Monday, 13 May 2013

मां...



     नहीं मयस्सर यहां तेरा आंचल मां
     लेकिन तेरी दुवाओं की छांव सिर पर है
     नहीं मिलती तेरे हाथ की रोटी यहां
     लेकिन वो स्वाद आज भी जिंदा है
     तु है तो मै हूं इस दुनिया में
     मां तो हर बच्चे के लिए दुआ है..
                                                 ज्योति सिंह

जिंदगी 'लॉकडाउन'

जिंदगी 'लॉकडाउन' सड़के विरान हो गईं गलियां सुनसान हो गईं भाग-दौड़ रही थी जिंदगी अचानक रफ्तार पर लगाम लग गई कैद हो गए अपने ही...