Saturday, 30 May 2015

सतत है संघर्ष का पथ





सतत है संघर्ष का पथ
निरंतर चलता प्रयास का रथ
कभी अटकते..तो कभी हैं भटकते
फिर भी...पांव हैं की थकते नहीं
मंजिल है की मिलती नहीं

सामने दिखता क्षितिज
फिर होती आकाश की कामना
धरा से व्योम का है लंबा सफर
फिर भी..पांव हैं की थकते नहीं
मंजिल है की मिलती नहीं
                         ज्योति सिंह




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