Thursday, 2 April 2020

जिंदगी 'लॉकडाउन'

जिंदगी 'लॉकडाउन'

सड़के विरान हो गईं
गलियां सुनसान हो गईं
भाग-दौड़ रही थी जिंदगी
अचानक रफ्तार पर लगाम लग गई

कैद हो गए अपने ही घर में
निकलने की भी मनाही हो गई
चार-दीवारी में बीत रहे हैं दिन
और इस तरह जिंदगी लॉकडाउन हो गई

चुप-चाप बीत रहे हैं दिन और रात
शामें भी खामोश हो गई हैं
घड़ी की सुईयां भी सरकती है धीरे-धीरे
समय पर मानो जैसे लगाम लग गई
और इस तरह जिंदगी लॉकडाउन हो गई

दूसरी तरफ नज़ारा कुछ और ही है
आकाश बहुत साफ है
बादल भी अपने रंग में हैं
परिंदे बेपरवाही से उड़ रहे हैं..
हवाएं भी मदमस्त है

सबक है इंसानियत के लिए
सबक है इस सदी के लिए
जो ना कि परवाह अपनी धरती की
तो यूं ही जिंदगी लॉकडाउन होती रहेगी      


                                                        ज्योति सिंह 'आज़मी'

जिंदगी 'लॉकडाउन'

जिंदगी 'लॉकडाउन' सड़के विरान हो गईं गलियां सुनसान हो गईं भाग-दौड़ रही थी जिंदगी अचानक रफ्तार पर लगाम लग गई कैद हो गए अपने ही...