कभी-कभी ढूंढते हैं वही पहली सीढ़ी
जिसे छोड़ आगे बढ़ने की जल्दी थी
कभी-कभी खोजते हैं वही खाली पल
जिसे छोड़ कर मशगूल होने की तलब थी
कभी-कभी वो लड़कपन भी याद आता है
जब जिंदगी की भागमभाग ना थी
किताबों को वो पन्ने भी यादों में फड़फड़ाते हैं
जिनसे छूटकारा पाने की बड़ी जल्दी थी
भाग रहें हैं सब जाने क्या पाने के लिए
जो बीत रहा है क्या उसे पकड़ पाओगे.. .ज्योति सिंह
जिसे छोड़ आगे बढ़ने की जल्दी थी
कभी-कभी खोजते हैं वही खाली पल
जिसे छोड़ कर मशगूल होने की तलब थी
कभी-कभी वो लड़कपन भी याद आता है
जब जिंदगी की भागमभाग ना थी
किताबों को वो पन्ने भी यादों में फड़फड़ाते हैं
जिनसे छूटकारा पाने की बड़ी जल्दी थी
भाग रहें हैं सब जाने क्या पाने के लिए
जो बीत रहा है क्या उसे पकड़ पाओगे.. .ज्योति सिंह