Sunday, 17 March 2013

मैं आज़मगढ़ से हूं....







आज़मगढ़...अरे बाप रे वही आज़मगढ़..आतंकवादियों वाला..बड़ी खतरनाक जगह है..बड़े खतरनाक होते हैं वहां के लोग...बम धमाकों के साथ ही जिस जगह का नाम बिना किसी हिचक और जांच के टीवी स्क्रीन्स पर फ्लैश होने लगता है.सिर्फ शक के आधार पर जहां हाईअलर्ट जारी कर दिया जाता है..बगैर किसी जानकारी के जहां के पढ़े लिखे लड़कों को जांच के नाम पर उठा लिया जाता है...मैं उसी शहर आज़मगढ़ से हूं...यहां पैदा होने की वजह से मेरा इस शहर से वैसे ही जुड़ाव है जैसे बच्चे का मां की गोद से..कितनी भी बड़ी हो जाउं ये गोद सुकून ही देती है...औरों का तो पता नहीं पर मुझे अपने शहर का नाम सुन कर खुशी होती है यहीं पैदा हुई और यहीं पढ़ाई की और आज इसी शहर की परवरिश ने मीडिया में कदम रखने का मौका दिया... लेकिन जब भी अपने शहर का नाम खबरों के बीच उछतला है तो मन में एक टीस सी उठती है....लगता है एक दो के नाम पर क्यों जाता है पूरा देश...दिल्ली और दूसरे शहरों में रहने वाले मेरे जाने कितने ही दोस्त हैं जो आज़मगढ़ से हैं और एक सफल मुकाम पर हैं...जी में आता है सबको सामने लाकर खड़ा कर दूं और कहूं देखो ये है असली आज़मगढ़..ये है आज़मगढ़ का टैलेंट..किसी से कम नहीं है...देश क्या विदेशों में भी यहां के लोगों की धाक कुछ कम नहीं है...आज भी देखा है कि कैसे लड़के लड़कियां दूर दराज के गांवों से  साइकिल खींचते हुए कॉलेज और स्कूल जाते हैं...चमक धमक से दूर लालटेन की रोशनी में भी वो आत्मविश्वास से भरपूर लगते हैं...उनके पास पीवीआर..मैकडी..डिस्क जैसा कोई आप्शन नहीं है...जहां वो जाके इंजाय कर सके लेकिन उन्हे इसका कोई मलाल नहीं है..इन चीजों की उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं है....वो तो दोस्तों के बीच ही इंजाय कर लेते हैं.....अपना करीयर बनाने की होड़ तो ऐसी है कि दौड़ दौड़ कर साइट्स और अखबारों की छानबीन करते रहते हैं....ऐसा माध्यम खोजते हैं जहां उन्हे सही दिशा मिल सके....लेकिन इनकी इस मेहनत और लगन को एक धमाके के साथ एक ही पल में ही गलत नाम दे दिया जाता है...आखिर क्यों....मुझसे भी मजाक में ही सही पर सवाल पूछे जाते हैं कि तुम तो आज़मगढ़ से हो.. आतंकवादी होगी....मुझे बुरा नहीं लगता मै तो शान से कहती हूं हां मैं आज़मगढ़ की आतंकवादी हूं ..और आपके साथ आपके ही चैनल में काम कर रही हूं... मै क्या ना जाने कितने पढ़े लिखे आज़मगढ़ के आतंकवादी हैं जो अपने टैलेंट के आतंक से हर जगह पर चमक रहे हैं....
                                            ज्योति सिंह

2 comments:

  1. आजमगढ़ जैसे न जाने कितने शहर हैं जो अपनी पहचान तलाश रहे हैं..दरअसल किसी भी ऐसे शहर जिसके पास "पुरस्कृत नेता" (जी हाँ पुरस्कृत) हों, वहां समाज में अच्छी छवि की उपेक्षा करना बेईमानी होगी....इन्तेजार करिये जन आक्रोश का, जन चेतना का, तब तक सुनने की आदत डालिए...सुनना भी होगा...हमने आपने चुना हैं इन्हें...

    ReplyDelete

जिंदगी 'लॉकडाउन'

जिंदगी 'लॉकडाउन' सड़के विरान हो गईं गलियां सुनसान हो गईं भाग-दौड़ रही थी जिंदगी अचानक रफ्तार पर लगाम लग गई कैद हो गए अपने ही...