Monday, 16 March 2015

दरकता समय...सरकता समय



दरकता समय..सरकता समय
घोड़े पर सवार भागता समय
देखकर कभी हंसता तुझ पर
कभी खुद की कीमत समझाता तुझे
अनमोल है वो कभी कहता नहीं
बीत जाने पर अहसास दिलाता तुझे
दरकता समय..सरकता समय..

ठहर जाना इसकी फितरत नहीं
दोस्ती ये किसी से करता नहीं
दुख का पहाड़..तो कभी खुशियों की गठरी
अपने साथ कुछ लेकर ही आता समय
खुद बदलता तो कभी तुझे बदलता
अपनी राह चलता और चलाता समय
सरकता समय..दरकता समय...
                       ज्योति सिंह

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