बड़े बड़े बंगले और उसके सामने बैठे गार्ड्स....जिनका काम होता है आलिशान
बंगलों का ख्याल रखना..धूप हो या बरसात..कड़ाके की ठंड हो या फिर गर्मी ये आपको
हमेशा एक ही जगह पर मिलेंगे..इन्ही बंगलों के सामने कुर्सी पर बैठे हुए या आसपास
टहलते हुए..बंगले के मालिक से बस इतना ही नाता होता है कि आते जाते साहब को इस कदर
सलामी ठोकना... जैसे साहब कोई जंग जीत कर आ रहे हों..या फिर जीतने जा रहे
हों..छोटे छोटे कस्बों या गांवों से आने वाले ये गार्ड्स किसी फौजी से कम नहीं
होते..वर्दी पहने हुए किसी भी मौसम में ये आपके एक ही जगह पर एक ही हालत में
मिलेंगे..साहब के बंगले की सुरक्षा में लगे हुए...कभी कभी ये देख के दिमाग सोचने
पर मजबूर होता है कि सबसे ज्यादा काम करने वाला एक वर्ग ना हो तो क्या होगा...गौर
करे तो हर छोटे छोटे काम के लिए हम किसी ना किसी पर निर्भर होते हैं..चाहे सफाई
हो या फिर कपड़ो की धुलाई..चाहे अखबार लाने वाला या कूड़ा ढोने वाला...अगर इनमें
से एक ने भी बस एक दिन छुट्टी मार दी तो बस लगता है...पूरा दिन खराब हो गया हो....हमारी
रोजमर्रा की जिंदगी के ये सारे लोग बड़े ही अहम पहलू हैं...जिन पर हम कभी ध्यान
नहीं देते..हमे लगता है ये तो उनका काम है...लेकिन..अब जरा गौर फरमाइये...सवेरे की
शुरूआत होती है दूध और न्यूज पेपर वाले भईया से...फिर काम वाली आंटी..फिर कूड़े
वाला भईया...उसके बाद सब्जी वाला..इसी तरह आफिस में चाय वाला हो या लिफ्ट वाला हर
जगह ये अपनी मौजूदगी दर्ज करते हैं... हर इंसान अपनी जिंदगी में तरक्की चाहता
है...कोई भी छोटे से ओहदे पर ज्यादा वख्त तक नहीं रहना चाहता...लेकिन जरा सोचिए इन
लोगों के बारे में कि अगर ये भी अपने काम को छोटा समझ कर...उसे करना छोड़ दें...तो
समाज के इस सिस्टम का क्या होगा...
ज्योति सिंह
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