तुझ जैसी जिंदादिली कहां से लाऊं मां
तु तो गमों को हंसकर छुपा ले जाती है
उदास ना हो जाऊ कहीं मैं तेरे लिए ये सोचकर..
"मैं ठीक हूं".. तु बस यही दोहराती है
तेरे पैरों की धूल बहुत याद बहुत आती है...
जब भी कामयाबी उपर लेकर जाती है..
देख तेरी दुआओं का असर हुआ है.
मां फिर से तेरा चेहरा याद आया है...
ज्योति सिंह
yr simple lines...touches my heart..
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