तारीखें क्यों बनाई गई..ये तो नहीं पता
ज़रूर कुछ याद दिलाने का सबब होगा।।
ज़रूर कुछ याद दिलाने का सबब होगा।।
दिन महीने और साल क्यों बने
शायद कुछ पूरा हो जाने का अहसास होगा
शायद कुछ पूरा हो जाने का अहसास होगा
अच्छे हैं बुरे हैं जैसे भी हैं..ये दिन ही तो हैं
हो सकता है बदलने का इंतज़ार होगा।।
ज्योति सिंह 'आज़मी'
हो सकता है बदलने का इंतज़ार होगा।।
ज्योति सिंह 'आज़मी'
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