एक आग..एक आंसू..
आस में बढ़ते हाथ
निवाले को तरसती आंखें
करती हैं पूरे मुल्क से सवाल
दर्द..मजबूरी..औऱ भूख
बिलखते मासूम बच्चे
बेबस बेचारी मां
करती है समाज से सवाल
बिखरा और फेंका हुआ अनाज
सड़ता बर्बाद होता हरा सोना
बर्बादी औऱ सिर्फ बर्बादी
आस पास हर तरफ सवाल ही सवाल
क्या है जवाब..क्या है जवाब.. एक आग..एक आंसू..
निवाले को तरसती आंखें
करती हैं पूरे मुल्क से सवाल
दर्द..मजबूरी..औऱ भूख
बिलखते मासूम बच्चे
बेबस बेचारी मां
करती है समाज से सवाल
बिखरा और फेंका हुआ अनाज
सड़ता बर्बाद होता हरा सोना
बर्बादी औऱ सिर्फ बर्बादी
आस पास हर तरफ सवाल ही सवाल
क्या है जवाब..क्या है जवाब..
आस में बढ़ते हाथ
निवाले को तरसती आंखें
करती हैं पूरे मुल्क से सवाल
दर्द..मजबूरी..औऱ भूख
बिलखते मासूम बच्चे
बेबस बेचारी मां
करती है समाज से सवाल
बिखरा और फेंका हुआ अनाज
सड़ता बर्बाद होता हरा सोना
बर्बादी औऱ सिर्फ बर्बादी
आस पास हर तरफ सवाल ही सवाल
क्या है जवाब..क्या है जवाब......
निवाले को तरसती आंखें
करती हैं पूरे मुल्क से सवाल
दर्द..मजबूरी..औऱ भूख
बिलखते मासूम बच्चे
बेबस बेचारी मां
करती है समाज से सवाल
बिखरा और फेंका हुआ अनाज
सड़ता बर्बाद होता हरा सोना
बर्बादी औऱ सिर्फ बर्बादी
आस पास हर तरफ सवाल ही सवाल
क्या है जवाब..क्या है जवाब......
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